आनंद

जीवन मे आनंद उस कस्तुरी की तरह होता है जो  उसके पास होता तो है लेकिन वो उसे कहीं और ढूंढता है और उसे जीवन पर्यंत ढूंढता रह जाता है वास्तविक आनंद आपके अंदर होता है ..

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